नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को बीसीसीआई और राज्य क्रिकेट संघों के बीच सारे वित्तीय लेन-देन रोक दिये और शीर्ष क्रिकेट संस्था को निर्देश दिया कि जब तक वह न्यायमूर्ति आर एम लोढा पैनल की सुधार की सिफारिशों को लागू नहीं करता वह किसी भी राशि को वितरित नहीं कर सकता, यहां तक कि मैच के आयोजन के लिए भी नहीं। शीर्ष अदालत ने बीसीसीआई अध्यक्ष अनुराग ठाकुर और सचिव अजय शिर्के को यह भी निर्देश दिया कि वे तीन दिसंबर तक शीर्ष अदालत और लोढा पैनल के समक्ष हलफनामा पेश करें कि उन्हें इन सुधारों को लागू करने में कितना समय लगेगा।
प्रधान न्यायाधीश टी एस ठाकुर और न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूण और एल नागेश्वर राव की पीठ ने लोढा पैनल को बीसीसीआई के सभी खातों की जांच के लिये स्वतंत्र ऑडिटर नियुक्त करने के लिये कहा है। ये ऑडिटर बीसीसीआई के वित्तीय खातों की जांच करेंगे। ये ऑडिटर लोढ़ा पैनेल नियुक्त करेगी। बीसीसीआई के वित्तीय मामलों पर लोढ़ा कमेटी नजर रखेगी। साथ ही वित्तीय मामलों पर लोढ़ा कमेटी का दखल होगा। यह आदेश न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूण ने सुनाया। उन्होंने लोढा पैनल से बीसीसीआई द्वारा दिये गये बड़ी राशि के अनुबंधों की जांच ऑडिटर से कराने को कहा है।
पैनल सचिव को शीर्ष अदालत के आदेश की एक प्रति आईसीसी अध्यक्ष शशांक मनोहर को भेजने के लिये भी कहा। सुप्रीम कोर्ट ने 17 अक्तूबर को बीसीसीआई में व्यापक सुधारों की लोढा समिति की सिफारिशों को लागू करने के अपने आदेश को बरकरार रखा था। अदालत ने बीसीसीआई अध्यक्ष अनुराग ठाकुर और इसके महासचिव (क्रिकेट परिचालन) रत्नाकर शेट्टी को उन आरोपों के बारे में बताने को कहा था कि बीसीसीआई ने आईसीसी मुख्य कार्यकारी अधिकारी डेव रिचर्डसन को पत्र लिखा था कि लोढा पैनल के निर्देश सरकारी हस्तक्षेप के समान हैं। दोनों क्रिकेट प्रशासकों का बचाव कर रहे सीनियर वकील कपिल सिब्बल ने कहा, ‘बीसीसीआई को खलनायक की तरह पेश किया जा रहा है। यह ऐसा है जैसे बीसीसीआई के कारण ही हर गलत चीज हो रही है।’ मामले की अगली सुनवाई 5 दिसंबर को होगी। बीसीसीआई में फैली भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस (सेवानिवृत्त) आर एम लोढ़ा की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी ने कई सिफारिशें की है। बीसीसीआई ने कुछ सिफारिश जैसे एक सीएजी की नियुक्ति को मान लिया है, लेकिन कई सिफारिशों को मानने में बोर्ड को दिक्कत हो रही है।
पैनल सचिव को शीर्ष अदालत के आदेश की एक प्रति आईसीसी अध्यक्ष शशांक मनोहर को भेजने के लिये भी कहा। सुप्रीम कोर्ट ने 17 अक्तूबर को बीसीसीआई में व्यापक सुधारों की लोढा समिति की सिफारिशों को लागू करने के अपने आदेश को बरकरार रखा था। अदालत ने बीसीसीआई अध्यक्ष अनुराग ठाकुर और इसके महासचिव (क्रिकेट परिचालन) रत्नाकर शेट्टी को उन आरोपों के बारे में बताने को कहा था कि बीसीसीआई ने आईसीसी मुख्य कार्यकारी अधिकारी डेव रिचर्डसन को पत्र लिखा था कि लोढा पैनल के निर्देश सरकारी हस्तक्षेप के समान हैं। दोनों क्रिकेट प्रशासकों का बचाव कर रहे सीनियर वकील कपिल सिब्बल ने कहा, ‘बीसीसीआई को खलनायक की तरह पेश किया जा रहा है। यह ऐसा है जैसे बीसीसीआई के कारण ही हर गलत चीज हो रही है।’ मामले की अगली सुनवाई 5 दिसंबर को होगी। बीसीसीआई में फैली भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस (सेवानिवृत्त) आर एम लोढ़ा की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी ने कई सिफारिशें की है। बीसीसीआई ने कुछ सिफारिश जैसे एक सीएजी की नियुक्ति को मान लिया है, लेकिन कई सिफारिशों को मानने में बोर्ड को दिक्कत हो रही है।
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